भारतीय मनोविज्ञान का परिचय (Introduction of Indian Psychology)
भारतीय मनोविज्ञान का परिचय प्राप्त करने से पूर्व यह स्पष्ट कर देना प्रासंगिक होगा कि आज मनोविज्ञान के क्षेत्र में भारतीय मनोविज्ञान की क्या स्थिति है। आधुनिक समय में मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान माना जाता है अर्थात् मनोविज्ञान को विधायक विज्ञान की एक शाखा के रूप से मानकर इसके अन्तर्गत मानव एवं पशु जगत के व्यवहार सम्बन्धी उन अध्ययनों को सम्मिलित किया जाता है जिनको प्रयोगशाला में प्रयोगों द्वारा प्रमाणित किया जा सके। इस प्रकार आधु निक मनोविज्ञान का सम्बन्ध मानव व्यवहार के बाह्य पक्ष का अध्ययन करने में ही माना जाता है किन्तु भारतीय मनोविज्ञान के सम्बन्ध में यह बात चरितार्थ नहीं होती। इसका मूल कारण यह है कि प्रत्येक देश की चिन्तन धारा के प्रत्येक पक्ष पर वहाँ की संस्कृति का अत्यधिक प्रभाव होता है और भारतीय संस्कृति की प्रकृति आध्यात्मिक है इसलिये यहाँ के प्रत्येक क्षेत्र के चिन्तन पर आध्यात्मिकता का प्रभाव स्पष्ट दिखलाई पड़ता है। इसी कारण भारतीय मनोविज्ञान पर भी आध्यात्मिक क्षेत्र में ही अधिक अनुसंधान हुये हैं ।
भारतीय मनोविज्ञान क्या है? (What is Indian Psychology) -
उपरोक्त विवेचन के सन्दर्भ में सर्वप्रथम यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि भारतीय मनो विज्ञान क्या है ? इस विषय में यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि भारतीय मनो विज्ञान में भारतीय शब्द के प्रयोग का यह तात्पर्य नहीं है कि यह अन्य मनोविज्ञानों से भिन्न कोई मनोविज्ञान है अपितु यहाँ भारतीय शब्द के प्रयोग का यह तात्पर्य है। कि भारत में अति प्राचीन काल से अब तक जो भी मनोवैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। उन सबको भारतीय मनोविज्ञान के नाम से जाना जाता है अर्थात् भारतीय मनो विज्ञान भारत में हुए प्राचीन एवं नवीन मनोवैज्ञानिक अनुसंधानों एवं अध्ययनों का समग्र रूप है। इस रूप में यहां भारतीय शब्द को इस अर्थ में समझना चाहिये कि जैसे रूस में हुये मनोवैज्ञानिक अनुसंधानों एवं अध्ययन के समग्र रूप को रूसी मनो विज्ञान कहा जाता है, उसी प्रकार यहां भारतीय शब्द का भी यही अभिप्राय है । इसके अतिरिक्त भारतीय मनोविज्ञान को इस रूप में अलग माना जा सकता है जिस रूप में फ्रेंच संस्कृति का प्रभाव होने से फँच मनोविज्ञान को तथा ब्रिटिश संस्कृति का प्रभाव होने से ब्रिटिश मनोविज्ञान को अलग नाम दिया जाता है उसी प्रकार भारतीय संस्कृति से प्रभावित होने के कारण भारतीय संस्कृति को अलग नाम से पुकारा जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति की पृष्ठभूमि में जिस मनोविज्ञान का विकास हुआ उसे भारतीय मनोविज्ञान कहा जाता है।
भारत में पिछले 25 वर्षों में हुई विज्ञान की प्रगति का सर्वेक्षण करते हुये सन् 1938 के भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अधिवेशन में डॉ० जी० बोस ने भारतीय मनो विज्ञान के विषय में कहा था, "भारत के प्राचीन विद्वानों में अन्तदर्शन के द्वारा मनन की विशेष प्रतिमा यी और भारतीय मनोवैज्ञानिक इस विरासत को लिये हुए हैं। इस दृष्टि से वह पश्चिम में अपने सहयोगी से अधिक अच्छी स्थिति रखता है। यदि इस शक्ति को उचित रूप से बढ़ाया गया तो गहन अन्तर्दर्शन की आवश्यकता वाली समस्याओं जैसे विचार की प्रक्रियाओं, उच्चतर सांस्कृतिक सहज ज्ञान इत्यादि को सफलता पूर्वक सुलझाया जा सकेगा। सन्तों और योगियों का रहस्यवादी अनुभव मनोवैज्ञानिक अनुसंधान की विषय वस्तु होना चाहिये और भारतवर्ष इस प्रकार के अध्ययन के लिए सर्वोत्तम स्थान है।'

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