भारतीय मनोविज्ञान की प्रकृति (Nature of Indian Psychology )
भारतीय मनोविज्ञान के स्वरूप को स्पष्ट रूप में समझने के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि इसकी प्रकृति क्या है ? अर्थात् भारतीय मनोविज्ञान विज्ञान है। अथवा कला है, और यदि विज्ञान है तब यह कैसा विज्ञान है ? इन सब तथ्यों का विवेचन निम्न प्रकार किया जा सकता है—
(1) भारतीय मनोविज्ञान एक विज्ञान है-
भारतीय मनोविज्ञान भी विज्ञान है किन्तु यह उस अर्थ में विज्ञान नहीं है जिस अर्थ में पाश्चात्य मनोविज्ञान है वरन् इसको विज्ञान कहने का यह तात्पर्य है कि इसमें वैज्ञानिक विधि सम्मत सोपान, जैसे निरीक्षण, वर्गीकरण, सामान्यीकरण, परीक्षण आदि स्पष्ट दिखलाई पड़ते है। भारतीय मनो विज्ञान का अध्ययन करने पर यह ज्ञात होता है कि भारतीय मनोवैज्ञानिकों ने अपने निरीक्षण को उनसे जितना सम्भव हो सका उतना ही वस्तुगत बनाने का प्रयास किया है । इसी कारण चेतन के स्तर, पंच कोष, व्यक्तित्व की संरचना, मन को नियंत्रित करने के उपाय आदि मनोवैज्ञानिक क्षेत्र के विषयों में जो निरीक्षण हुए उनमें किसी प्रकार का मतभेद नहीं पाया जाता है और उनको सभी विचारकों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर है। इस प्रकार भारतीय मनोविज्ञान में वैज्ञानिक पद्धति द्वारा ही निरीक्षण किये गये। इसके अतिरिक्त इससे प्राप्त निष्कर्ष भी वैज्ञानिक हैं क्योंकि उन्हीं निष्कर्षो को सही माना जाता है, जिनको सभी मनोवैज्ञानिक अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों के आधार पर सही पायें तथा जो सभी के अनुभवों के विषय हों और भारतीय मनोविज्ञान के निष्कर्षो में यह बात शत प्रतिशत सही है। इसलिये यह कहना कि भारतीय मनोविज्ञान अवैज्ञानिक है, उचित नहीं है । यद्यपि यह भौतिक शास्त्र तथा रसायन शास्त्र की भांति विधायक विज्ञान नहीं है तथापि यह तो आज सभी पश्चिमी मनोवैज्ञानिक भी अनुभव कर रहे हैं कि मनोविज्ञान में सभी बातों का ज्ञान भौतिक विज्ञानों की विधियों द्वारा प्राप्त करना सम्भव नहीं है। यही कारण था कि वुडवर्थ ने जीवन भर मनोविज्ञान को अन्तर्दर्शन विधि का समर्थन किया तथा इसी कारण गोर्डन आलपोर्ट ने यह कहा कि, "हिन्दू मनोविज्ञान में अध्ययन तत्व पश्चिम के वैज्ञानिक विधि से अपेक्षाकृत कम जानकारी से निकलता है अथवा यह कि पाश्चात्य वैज्ञानिक विधि एक संकीर्ण सम्प्रदाय है जो कि प्रकृति से भिन्न तत्व के प्रति आँखें बंद कर लेती है। यह में, इस क्षण कहने के लिए तैयार नहीं हूं। सम्भवतया दोनों ही पक्षों में कुछ कटौतियों की आवश्यकता है।" इस प्रकार स्पष्ट है कि पश्चिम के मनोवैज्ञानिकों ने भी मनो विज्ञान में प्रचलित विधियों के प्रति असंतोष प्रकट किया तथा इस आवश्यकता पर बल दिया है कि मनोविज्ञान के अनेक क्षेत्रों में भारतीय दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिये अतः इसमें भी भारतीय मनोविज्ञान एक विज्ञान सिद्ध होता है।
(2) भारतीय मनोविज्ञान व्यवहारिक विज्ञान है—
भारतीय मनोविज्ञान पाश्वात्य की झांति कोई स्वतन्त्र विज्ञान नहीं है क्योंकि यह सदैव ही दर्शन की छाया में फला फूला है। इसलिये यह विधायक विज्ञानों की अपेक्षा तर्क शास्त्र, नीतिशास्त्र और सौंदर्यशास्त्र जैसे नियामक विज्ञानों के अधिक निकट है। इस प्रकार भारतीय मनोविज्ञान सैद्धांतिक दृष्टि से विधायक विज्ञान से अधिक व्यवहारिक विज्ञान है क्योंकि इसमें व्यावहारिक अनुभवों पर अधिक बल दिया गया है।
(3) भारतीय मनोविज्ञान कला भी है—
जैसा कि पूर्व विवेचन में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय मनोविज्ञान दर्शन के साथ 2 सौंदर्यशास्त्र के भी अधिक निकट रहा है। अतः यह मात्र दर्शन की शाखा ही नहीं है वरन् यह कला भी है। भारतीय मनोविज्ञान में मन को नियन्त्रित करने के उपायों का विवेचन किया गया है। इस रूप में यह मन के नियंत्रण की कला भी है। इसी प्रकार संकलित व्यक्तित्व को निर्माण करने एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में विकास करने की कला भी है। इससे यह स्पष्ट है कि भारतीय मनोविज्ञान कला भी है।
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि भारतीय मनोविज्ञान भारतीय संस्कृति की पृष्ठभूमि में पल्लवित हुआ है इसीलिये इस मनोविज्ञान के साथ भारतीय शब्द प्रयुक्त हुआ है तथा इसकी प्रकृति वैज्ञानिक होने से यह विज्ञान है और व्यवहारिक विज्ञानों के निकट होने से यह व्यावहारिक विज्ञान है। इसके अतिरिक्त इसमें मन को नियन्त्रित करने तथा आध्यात्मिक विकास की कला का वर्णन है, इस रूप में यह कला भी है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें