उपकल्पना (Hypothesis)


 उपकल्पना (Hypothesis)

            टाउन सेण्ड (1953) के अनुसार, उपकल्पना किसी समस्या का प्रस्तावित उत्तर है।" गुड तथा हाट (1952) के अनुसार, "उपकल्पना वह करन है जो बताता है कि हम क्या देखना चाहते हैं। उपकल्पना आगे की ओर देखती है। यह एक तर्कपूर्ण वाक्य है जिससे वैधता की परीक्षा की जा सकती है। यह सही भी सिद्ध हो सकती है और गलत भी। करलिंगर (1968) के अनुसार, "उपकल्पना दो या अधिक चरों के सम्बन्धों का अनुमान सम्बन्धी कथन है। मेकगुद्दगन (1969) के अनुसार, "परिकल्पना दो या अधिक चरों के कार्यक्षम सम्बन्धों का कथन है, इस कथन की जांच की जा सकती है।"

            उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि "परिकल्पना दो या अधिक चरों के अनुमान पर आधारित तर्कपूर्ण, कार्यक्षम, प्रस्तावित और परीक्षण योग्य है जो यह बताता है कि हम क्या देखना चाहते हैं। जांच के बाद यह कचन सही भी हो सकता है और गलत भी समस्या के पश्चात् उपकल्पना निर्धारित

1. "A hypothesis is a suggested answer to the problem."-J. C.Townsend, 1935.

2. “A hypothesis states what we are looking for. A hypothesis looks forward. It is a proposition which can be put to a test to determine its validity. It may prove to be correct or in- correct."-W. J. Goode & P. K. Hatt, 1952.

3. "A hypothesis is a conjectural statement of the relation between two or more variables."-F. N. Kerlinger, 1968. 4. "A hypothesis is a testable statement of a potential relationship between two or more variables."-F. J. McGuigan. 1969.

करनी चाहिए। उपकल्पना प्रयोगों या अध्ययन को एक निश्चित दिशा प्रदान करती है उपकल्पना और समस्या में प्रत्यक्ष सम्बन्ध है परिभाura में कहा जा है कि समस्या का प्रस्तावित उत्तर ही परिकल्पना है। परिकल्पना की अनुपस्थिति में प्रयोग या वैज्ञानिक अध्ययन सम्भव नहीं है. अतः कहा जाता है कि इसके अभाव में अध्ययन एक उद्देश्यहीन अध्ययन रह जाता है। यह भी कहा जाता है कि उप वैज्ञानिक अध्ययन में उसी प्रकार सहायक है जैसे अँधेरे में जा रहे व्यक्ति के लिए प्रकाश आवश्यक है। जिस प्रकार प्रकाश की अनुपस्थिति में व्यक्ति अंधेरे में रास्ता भूल सकता है उसी प्रकार उपकल्पना की अनुपस्थिति में व्यक्ति अध्ययन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं में रास्ता भूल सकता है। अतः कहा जा सकता है कि उप कल्पना वैज्ञानिक अध्ययन के लिए मार्गदर्शक का कार्य करती है। 

 उपकल्पना का महत्त्व या कार्य ( Importance or Functions of Hypothesis)

वैज्ञानिक अध्ययन में उपकल्पना के प्रमुख कार्य निम्न प्रकार से हैं- 

  1.  अध्ययन कार्य को निश्चित दिशा प्रदान करती है-उपकल्पना मे प्रयोगकर्ता को यह निश्चित हो जाता है कि उसे क्या और कितना अध्ययन करना है। गुड और हाट का कहना है कि उपकल्पना अध्ययनकर्ता को यह बताती है कि वह क्या अध्ययन करना चाहता है। इसकी उपस्थिति में अध्ययनकर्ता के निरर्थक प्रयत्न कम हो जाते हैं। अध्ययन में कौन-कौन-सी क्रियाएँ और क्या अध्ययन करना है, स्पष्ट हो जाता है यह अध्ययनकर्ता को एक निश्चित दिशा प्रदान करती है। कहा जाता है कि वैज्ञानिक अनुसन्धान में उपकल्पना एक केन्द्रीय पथ है।
  2.  अनुसन्धान या समस्या को सुनिश्चित करती है-किसी भी अनुसन्धान- कर्ता के लिए यह सम्भव नहीं होता है कि वह समस्या से सम्बन्धित सभी पहलुओं का अध्ययन करे। सभी पहलुओं के अध्ययन से शुद्ध ज्ञान की प्राप्ति कठिन है। उप- कल्पना समस्या को सुनिश्चित करती है अथवा उपकल्पना से समस्या निश्चित और विशिष्ट क्षेत्र वाली हो जाती है जिससे अध्ययनकर्ता व्यर्थ के खर्चों से बच जाता है।
  3.   उपकल्पना प्रमुख तथ्यों के संकलन में सहायक होती है— पहले बताया जा चुका है कि उपकल्पना बनाने से अध्ययन समस्या सुनिश्चित हो जाती है और अध्ययन के लिए एक विशेष दिशा ज्ञात हो जाती है। परिणामस्वरूप अध्ययन में अध्ययनकर्ता केवल उन्हीं आंकड़ों का संकलन करता है जो समस्या की सीमा में होते हैं। अध्ययन की परिसीमा से बाहर आँकड़ों का संकलन नहीं करते। दूसरे शब्दों में, अध्ययनकर्त्ता केवल उन आँकड़ों का संकलन करता है, जिनकी सहायता से उपकल्पना की वैधता की जाँच की जानी है।
  4. उपकल्पना प्रत्येक दशा में निष्कर्ष ढूंढ निकालने में सहायक होती है- उपकल्पना से सम्बन्धित आकड़ों को एकत्र करने के बाद इसकी वैधता को जांच की जाती है। उपकल्पना के परीक्षण के द्वारा अध्ययनकर्त्ता को वैज्ञानिक निष्कर्ष प्राप्त करना सरल हो जाता है। उपकल्पना की वैधता की जांच में उपकल्पना सही भी करनी चाहिए। उपकल्पना प्रयोगों या अध्ययन को एक निश्चित दिशा प्रदान करती है उपकल्पना और समस्या में प्रत्यक्ष सम्बन्ध है परिभाura में कहा जा है कि समस्या का प्रस्तावित उत्तर ही परिकल्पना है। परिकल्पना की अनुपस्थिति में प्रयोग या वैज्ञानिक अध्ययन सम्भव नहीं है. अतः कहा जाता है कि इसके अभाव में अध्ययन एक उद्देश्यहीन अध्ययन रह जाता है। यह भी कहा जाता है कि उप वैज्ञानिक अध्ययन में उसी प्रकार सहायक है जैसे अँधेरे में जा रहे व्यक्ति के लिए प्रकाश आवश्यक है। जिस प्रकार प्रकाश की अनुपस्थिति में व्यक्ति अंधेरे में रास्ता भूल सकता है उसी प्रकार उपकल्पना की अनुपस्थिति में व्यक्ति अध्ययन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं में रास्ता भूल सकता है। अतः कहा जा सकता है कि उप कल्पना वैज्ञानिक अध्ययन के लिए मार्गदर्शक का कार्य करती है। उपकल्पना की वैधता की जांच में उपकल्पना सही भी  सिद्ध हो सकती है और गलत भी दोनों ही दशाओं में सत्य की ही खोज होती है। 1 श्रीमती यंग (Pauline V, Young, 1966) का कहना है कि एक वैज्ञानिक के लिए नकारात्मक (Negative) परिणाम उतने ही महत्त्वपूर्ण और रोचक होते है जिसने कि धनात्मक परिणाम ।
  5.  उपकल्पना से पुनरावृत्ति (Replication) सम्भव हो जाता है कई बार अनुसन्धान के परिणामो की सत्यता की जांच के लिए पुनरावृत्ति या पुनरीक्षण करते हैं। यह पुनः परीक्षण वैज्ञानिक रूप से तभी सम्भव हो सकता है जब अध्ययन- कर्ता को समस्या के विशिष्ट पहलुओं का आवश्यक ज्ञान हो अर्थात् उपकल्पनाएँ ज्ञात हो ।
  6.  प्रयोगात्मक अनुसन्धान में उपरत्पना निर्माण के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रयोग को नया स्वरूप देना है। प्रयोग का स्वरूप परिकल्पना की शब्दावली पर आधारित होता है। 

            उपयोगी उपकल्पना को विशेषताएं (Characteristics of a Usable Hypothesis) उपयोगी उपकल्पना को निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं हैं:-

  1. परिकल्पना समस्या का पर्याप्त उत्तर (Adequate Answer) होना चाहिए चूँकि उपकल्पना समस्या का प्रस्तावित उत्तर है अतः यह उत्तर पर्याप्त होना आवश्यक है आवश्यक नहीं है कि किसी समस्या का एक हो प्रस्तावित उत्तर हो. कई प्रस्तावित उत्तर हो सकते हैं अतः अध्ययनकर्ता को उपकल्पना बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि समस्या के सम्बन्ध में यदि एक उपकल्पना पर्याप्त न हो उपनाओं की आवश्यकता हो. उतनी उपकल्पनाओं का निर्माण करना चाहिए।
  2.  उपकल्पना समस्या का सरल (Simple) उत्तर होना चाहिए— अध्ययन- कर्त्ता को उपकल्पना बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि उपकल्पना को शब्दावली सरल हो, भ्रमपूर्ण और कठिन भाषा का प्रयोग न हो, उपकल्पना सम्बन्धी कथन बहुत अधिक लम्बा न हो। जब उपकल्पना में ये विशेषताएं नहीं होती हैं तब उप- कल्पना के परीक्षण में कठिनाई होती है।
  3.  उपकल्पना प्रत्यय की दृष्टि से स्पष्ट (Conceptually Clear) होनी चाहिए— अच्छी उपकल्पना के लिए यह विशेषता भी आवश्यक है। एक उपयोगी की यह विशेषता होती है कि उपकल्पना से सम्बन्धित सभी प्रत्ययों की (Operational) परिभाषा की जा सके। संक्रियात्मक परिभाषाएँ प्रत्ययों के मापन को दृष्टि में की जाती है। यदि उपकल्पना से सम्बन्धित प्रत्ययों का परभाषीकरण नहीं दिया जा सकता है तो यह अस्पष्टता अध्ययन कार्य में आगे बाधक होती है। पत्थरों के परिभाषीकरण का एक नाम यह भी है कि यदि सरल और स्पष्ट है तो अन्य लोग भी उसका अर्थ सरलता से समझ लेते है। 
  4. परिकल्पना विशिष्ट (Specific) होनी चाहिए उनकी का गुण भी उपकल्पना से सम्बन्धित आंकड़ों के संकलन में सहायक होता है। अतः उपकल्पना का विशिष्ट होना आवश्यक है। विचिष्टता के गुण के अभाव में उपकल्पना की वैज्ञानिक कठिन है।
  5. उपकल्पना के सम्बन्ध में प्रदत्तों का संकलन सम्भव होना चाहिए- अध्ययनकर्त्ता यदि ऐसी उपकल्पना बनाता है जिस पर आंकड़े एकत्र करना सम्भव नहीं है तो इस प्रकार की उपकल्पना का निर्माण व्यर्थ है क्योंकि ऐसी उपकल्पना की जाँच सम्भव नहीं है ।
  6.  शून्य परिकल्पना (Null Hypothesis) अन्य परिकल्पनाओं की अपेक्षा श्रेष्ठ होती है-वैज्ञानिक अध्ययन में जहाँ उच्च सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग किया जा रहा है वहाँ शुन्य उपकल्पना अन्य उपकल्पनाओं की अपेक्षा अधिक उपयुक्त होती है। इसका वर्णन आगे किया है।
  7.  परिकल्पना में प्रयोग सिद्धता (Empirical Referents) या प्रमाणित करने योग्य (Verifiable) होनी चाहिए प्रयोग सिद्धता की विशेषता बहुधा निक अनुसन्धान में प्रयुक्त उपकल्पनाओं में होती है। प्रत्येक वैज्ञानिक अनुसन्धान में उपकल्पना की जांच कर निष्कर्ष निकालते हैं। यदि उपकल्पना परीक्षण योग्य नहीं होगी तो उसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता, ऐसी उपकल्पना को चुनना व्यर्थ है।
  8. उपकल्पना के परीक्षण के लिए यन्त्र (Tools) उपलब्ध होने चाहिए- प्रयोगकर्ता को उपकल्पना की रचना करते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि उपकल्पना के परीक्षण हेतु आंकड़ों के संकलन के लिए उपकरण बोर परीक्षण अवश्य उपलब्ध होने चाहिए अन्यथा उपकल्पना के सम्बन्ध में जॉकड़ों का संकलन एक समस्या बन जायेगी क्योंकि यन्त्रों और परीक्षणों का निर्माण केवल अनुभवी अध्ययनकर्ता ही कर पाते हैं। आधुनिक युग में दिन प्रतिदिन नई-नई समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं अतः हमेशा यह तो सम्भव नहीं है कि उपकल्पना ऐसी ही बनाई जाए कि यन्त्र और परीक्षण उपलब्ध हों परन्तु यह अवश्य है कि उपकल्पना ऐसी अवश्य होनी चाहिए जिसकी जांच उपलब्ध प्रविधियों द्वारा हो सके।
  9. उपकल्पना किसी सिद्धान्त (Theory) से सम्बन्धित होनी चाहिए- अध्ययनकर्त्ता को समस्या ऐसी बनानी चाहिए जो किसी न किसी सिद्धान्त से सम्बन्धित हो, बहुधा नए अनुसंधानकर्ता यह भूलकर बैठते हैं। नए अनुसंधानकर्त्ता में अनुभव का अभाव तो होता है वे रुचिपूर्ण विषयों की ओर पहले आकर्षित होते हैं। सिद्धान्तों पर आधारित या सम्बन्धित उपकल्पना केवल अनुभवी अनुसन्धानकर्ता ही बना सकते हैं।
  10. उपकल्पना का कथन इस प्रकार होना चाहिए कि एक उपकल्पना में न्यूनतम सम्बन्धों का उपयोग हो तथा यह सम्बन्ध एकत्रित प्रयोगात्मक तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।
  11.  परिकल्पना जिस अध्ययन क्षेत्र से सम्बन्धित है उस अध्ययन व को देखते हुए उपकल्पना एक सामान्य उपकल्पना होनी चाहिए। इससे निष्कर्षों (Deductions) की अधिक उत्पत्ति होती है तथा अधिक तथ्यों की व्याख्या सम्भव होती है।

उपकल्पना निर्माण की प्रमुख कठिनाइयाँ (Main difficulties in the formula- tion of Hypothesis) 

अनुसन्धानकर्त्ता को उपकल्पना बनाने में उस समय कठिनाई होती है जब अनुसन्धानकर्त्ता में निम्नलिखित अभाव होते हैं:-

  1.  अनुसंधान-क्षेत्र के ज्ञान का स्पष्ट न होना— अब तक अनुसन्धान- कर्ता को अनुसन्धान क्षेत्र का स्पष्ट ज्ञान नहीं होगा तो उसे उपकल्पना बनाने में कठिनाई होगी। अनुसन्धान क्षेत्र का ज्ञान होना उपकल्पना निर्माण के लिए आवश्यक है।
  2.  अनुसन्धान क्षेत्र के सैद्धान्तिक ज्ञान का अभाव :- उपकल्पना बनाने के लिए आवश्यक है कि अनुसन्धानकर्ता विभिन्न सिद्धान्तों को भली-भाँति जानता हो । अध्ययन क्षेत्र से सम्बन्धित सिद्धान्तों का स्पष्ट ज्ञान भी उपकल्पना निर्माण के लिए एक मौलिक आधार है।
  3. पूर्व अनुसन्धानों के ज्ञान का अभाव भी उपकल्पमा निर्माण में एक कठिनाई है:- अनुसन्धानकर्ता जिस क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उस क्षेत्र में उस समय तक जितने भी अनुसन्धान कार्य हुए हैं, उनका ज्ञान उपकल्पना बनाने के लिए आब- श्यक है। यदि अनुसन्धानकर्त्ता में इस ज्ञान का अभाव है तो भी उसे उपकल्पना बनाने में कठिनाई होगी। यह भी हो सकता है कि जिस क्षेत्र में अनुसन्धानकर्ता कार्य कर रहा है, उस क्षेत्र में पहले कोई कार्य ही न हुआ पूर्व अनुसन्धानों के अभाव में भी उपकल्पना बनाने में कठिनाई होती है।
  4. यन्त्र और उनकी जानकारी का अभाव:- अनुसन्धानकर्ता के लिए उसकी समस्या से सम्बन्धित यन्त्रों का ज्ञान आवश्यक है। अध्ययनकर्ता को यदि सम्बन्धित यत्रों का ज्ञान नहीं है तो उसे उपकल्पना बनाने में कठिनाई होगी। 

उपकल्पना के स्रोत (Sources of Hypothesis)


        अध्ययनकर्ता को उपकल्पना कहाँ से प्राप्त हो सकती है, इसका ज्ञान भी आवश्यक है। भिन्न-भिन्न विद्वानों ने उपकल्पना के स्रोत भिन्न-भिन्न बतलाये है। नीचे दिये हुए स्रोतों में प्रथम चार स्रोतों का वर्णन गुड और हाट (Goode & Hatt, 1952) ने किया है-

  1. सामान्य संस्कृति ( General Culture):- सामान्य संस्कृति जिसमें विज्ञान का विकास होता है वह भी उपकल्पनाओं का अच्छा स्रोत है। प्रत्येक संस्कृति में अनेक प्रकार की समस्याएँ होती हैं। संस्कृति की इन समस्याओं का शन भी उपकल्पनाओं का एक अच्छा स्रोत है ।

  2.  वैज्ञानिक सिद्धान्त (Scientific Theory ) :- प्रत्येक विज्ञान के विभिन्न विषयों से सम्बन्धित अनेक सिद्धान्त होते हैं। यह सिद्धान्तही अनुसन्धानका जार होते हैं। जिस अध्ययनकर्ता को इनकी जितनी ही अधिक जानकारी होती है वह उतनी ही उपकल्पनाओं की रचना कर सकता है। गुड तथा हाट का विचार है कि उपकल्पनाओं का जन्म स्वयं विज्ञान में होता है। अतः प्रत्येक विज्ञान उपकल्पना का स्रोत है। उदाहरण के लिए, मनोविज्ञान का ज्ञान जिस अध्ययनकर्ता को होगा वही उपकल्पनाओं का निर्माण कर सकता है।

  3. सादृश्य (Analogy):- सादृश्य दो घटनाओं या विषयों में समानता को कहते हैं। जिस अध्ययनकर्त्ता का सादृश्य सम्बन्धी ज्ञान अच्छा है वह सरलता से उपकल्पनाएँ बना सकता है, उदाहरण के लिए, मानव व्यवहार और पशु व्यवहार के ज्ञान के आधार पर अनेक उपकल्पनाएं बनाई जा सकती है।

  4.  व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience ) :- अध्ययनकर्त्ता के व्यक्ति गत अनुभव उपकल्पना के सबसे अच्छे और बड़े स्रोत हैं। अध्ययन क्षेत्र में अनु सन्धानकर्त्ता का जितना अधिक अधिकार होगा, वह उतनी ही अधिक उपकल्पनाओं का निर्माण कर सकता है।

  5.  रचनात्मक चिन्तन और सूझ (Creative Thinking & Insight):- यह दो शक्तियां भी उपकल्पना की अच्छी स्रोत हैं। अध्ययनकर्त्ता में जितनी ही अधिक सूझ और रचनात्मक चिन्तन की योग्यता होगी वह उतनी ही अधिक उपकल्पना की रचना कर सकता है।

  6. अनुभवी व्यक्तियों से अनुसन्धान क्षेत्र के सम्बन्ध में बातचीत से भी उपकल्पनाओं की रचना सम्भव है।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें