शून्‍य परिकल्‍पना (Null Hypothesis)


शून्‍य उपकल्पना (Null Hypothesis) --

                    Null जर्मन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ शून्य है इस परिकल्पना में अध्ययनकर्ता यह मानकर चलता है कि जिन दो परिवर्तियों में सम्बन्ध ज्ञात किया जा रहा है, उनमें कोई अन्तर नहीं है। इस परिकल्पना का उदाहरण है— समूह 'क' और समूह 'ख' की बुद्धि-सब्धि में कोई अन्तर नहीं है। इस उपकल्पना की सहायता से विभिन्न प्रतिदर्शों के अन्तर की सायंकता (Significant Difference) का अध्ययन किया जाता है। इस उपकल्पना का संकेत चिन्ह Ho है। गैरेट (H. E. Garrett, 1967) के अनुसार, "शून्य उप- कल्पना की यह मान्यता है कि समष्टि (Population) के दो प्रतिदर्श मध्यमानों में सत्य अन्तर नहीं है और यदि प्रतिदर्श मध्यमानों में कोई अन्तर है तो यह संयोगजन्य (Accidental) है और यह अन्तर महत्त्वपूर्ण नहीं है।" प्रायः वैज्ञानिक अध्ययनों में शून्य परिकल्पना का ही उपयोग किया जाता है क्योंकि वैज्ञानिक या सांख्यिकीय अध्ययनों में इस प्रकार की परिकल्पना सरल और श्रेष्ठ समझी जाती है। इस परि- कल्पना की सहायता से दो प्रतिदर्श मध्यमानों के अन्तर की सार्थकता की जांच की जाती है परन्तु प्रतिदर्श का मध्यमान कम है या अधिक, इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। मध्यमानों का अन्तर धनात्मक भी हो सकता है और ऋणात्मक भी। इन दोनों क्रियाओं की ओर मध्यमानों के अन्तर का बराबर महत्त्व है। इस अवस्था में अन्तर की सार्थकता की जाँच या परीक्षण द्विपक्षीय (Tow-tailed) होता है। शून्य परिकल्पना इस प्रकार की भी बनाई जा सकती है कि मध्यमानों के अन्तर की सार्थकता की जांच केवल एकपक्षीय (One tailed test) हो अर्थात् धनात्मक पक्ष की ओर हो या ऋणात्मक पक्ष की ओर हो । शून्य उपकल्पना उस समय सत्य, रहती है जब अन्तर सार्थक अन्तर नहीं (Non-significant ) होता है इस प्रकार की उपकल्पना निर्देश रहित (Non-Directional) होती है।

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