साक्षात्कार (Interview)शब्द का शाब्दिक अर्थ अतंरिक अवलोकन करना होता हैं। साक्षात्कार से अभिप्राय एक ऐसी स्थिति से हैं। जिसमें एक व्यक्ति और साक्षात्कारकर्ता, आमने-सामने के पारस्परिक मौखिक आदान-प्रदान से दूसरे व्यक्ति को सूचना देने अथवा अपने विचार तथा विश्वास को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता हैं।
'' साक्षात्कार अंतर व्यक्तिगत भूमिका की एक ऐसी स्थिति हैं जिसमें एक व्यक्ति साक्षात्कारकर्ता, दूसरे व्यक्ति जिसका साक्षात्कार जिसका साक्षात्कार किया जा रहा हैं अथवा उत्तरदाता से उन प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करना चाहता हैं, जिनकी रचना संबंधित अनुसंधान समस्या के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए की गई हैं''
(The interview is a face to face interpersonal role situation in which one person, the interviewer, asks a person being interviewed, the respondent, the questions designed to obtain answers pertinent to the purposes of the research problem ).
अत: साक्षात्कार आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान में एक साधारण क्रिया नहीं हैं बल्कि अब इसने एक अति विकसित कला तथा अध्ययन की वैज्ञानिक पद्धति का रूप धारण कर लिया हैं।
विशेषतायें(Characteristics) -
(i) यह एक ऐसा सामाजिक प्रक्रम(social process) हैं जिसमें दो या दो से अधिक
व्यक्तियों का सम्बन्ध रहता हैं।
(ii) उनका यह सम्बन्ध पारस्परिक रूप से आमने-सामने (face to face) होता हैं तथा
ऐसे संबंध में मैत्रिक भावना(rapport) रहती हैं।
(iii) उनके मिलने व वार्तालाप करने में एक उद्देश्य निहित रहता हैं।
(iv) उनकी इस पारस्परिक वार्तालाप का किसी एक रूप में अभिलेख (record)
आवश्यक रहता हैं।
साक्षात्कार विधि के गुण - इस विधि के निम्नलिखित गुण हैं-
(i) साक्षात्कार में उत्तरदाता के साथ संबंध प्रत्यक्ष होते हैं जिससें सही जानकारी
अधिकाधिक प्राप्त होती हैं।
(ii) साक्षात्कार में प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होने के साथ-साथ उसके चेहरे की अभिव्यक्ति
एवं हाव-भावों (facial expression ) का भी पता लगाया जा सकता हैं।
(iii) साक्षात्कार में लचीलपन (flexibility) पाया जाता हैं क्योंकि इसमें परिस्थिति को
देखकर परिवर्तन किया जा सकता हैं।
(iv) साक्षात्कार विशेषज्ञों (experts) द्वारा लिये जाते हैं जिससे परिणाम
विश्वसनीय(reliable) प्राप्त होते हैं।
(v) साक्षात्कार का प्रयोग अशिक्षित लोगों पर भी किया जा सकता हैं । इसका विस्तार
विस्तृत होता हैं।
(vi) साक्षात्कार के द्वारा बालक में सामाजिकता का विकास होता हैं क्योंकि कठिनाई
होती हैं क्योंकि या तो व्यक्तियों के पास समय नहीं होता अथवा समयाभाव के कारण
यह उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाता हैं।
सीमायें (Limitations)-
(i) साक्षात्कार के लिए व्यक्ति को तैयार करने में कठिनाई होती हैं क्योंकि या तो
व्यक्तियों के पास समय नहीं होता अथवा समयाभाव के कारण यह उद्देश्य पूर्ण नहीं
हो पाता हैं।
(ii) साक्षात्कार में जब व्यक्तियों से जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो वह अपने
व्यक्तिगत जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी देते हैं तथा कुछ आवश्यक तथ्य भी
उनके द्वारा छिपा लिये जाते हैं।
(iii) साक्षात्कार विधि से जानकारी उस समय तक पूर्णरूप से प्राप्त नहीं की जा सकती
जबतक कि साक्षात्कारकर्ता स्वयं योग्य, अनुभवी एवं दक्ष व्यक्ति न हों।
(iv) साक्षात्कारकर्ता को प्रयोज्य की मौखिक रिपोर्ट पर आश्रित रहना पडता हैं और यह
फिर भी आवश्यक नहीं कि प्रयोज्य अपने बारे में सही जानकारी दें।
(v) प्राय: सूचनादाता साक्षात्कारकर्ता या साक्षात्कार के वातावरण से भयभीत हो जाता है,
ऐसी अवस्था में वह कोई प्रत्युत्तर नहीं दे पाता ।
(vi) चूँकि इसका प्रयोग प्रशिक्षित(trained) लोगों द्वारा किया जाता हैं; तथा साथ ही एक
समय में एक ही व्यक्ति का साक्षात्कार लिया जाता हैं अत: यह एक खर्चीली विधि हैं।

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