क्रमगुणित क्या है


 एक क्रमगुणित अभिकल्‍प 

(FACTORIAL DESIGNS)

एक क्रमगुणित अभिकल्‍प की रचना ऐसी होती हैं कि इसके द्वारा दो या दो से अधिक स्‍वतन्‍त्र चरों के लगभग समस्‍त संयोजनों(combinations) का अध्‍ययन सम्मिलित रहता हैं। दूसरें शब्‍दों में दो या दो से अधिक स्‍वतंत्र चरों के प्रमाण को क्रमगुणित अभिकल्‍प के माध्‍यम से एक ही प्रायोगिक अध्‍ययन में सम्‍पन्‍न किया जा सकता हैं। 

कर्क के अनुसार,-'एक क्रम‍गुणित प्रयोग एक शोधकर्ता को दो या दो से अधिक अभिक्रियाओं के सम्मिलित प्रभावों को एकल प्रयोग के माध्‍यम से मूल्‍यांकन करने की सुविधा प्रदान करता हैं।'

मैक्‍गुइगन ने क्रमगुणित अभिकल्‍प की परिभाषा को अधिक विस्‍तृत रूप देते हुए लिखा हैं,-'एक पूर्ण क्रमगुणित अभिकल्‍प एक ऐसा अभिकल्‍प होता हैं, जिसके अन्‍तर्गत दिये गये स्‍वतन्‍त्र चरों में से प्रत्‍येक चर के चयन किये गये मानों के समस्‍त संभावित संयोजनों का उपयोग किया जाता हैं।'

करलिंगर ने क्रमगुणित अभिक्रल्‍प एक ऐसी अनुसंधान रचना हैं, जिसके अन्‍तर्गत दो या दो से अधिक स्‍वतन्‍त्र चरों को आमने-सामने इस प्रकार प्रस्‍तुत किया जाता हैं जिससे उनके आश्रित चर पर पडने वाले स्‍वतन्‍त्र प्रभावों तथा पारस्‍परिक प्रभावों का अध्‍ययन किया जा सकें।'

इस परिभाषा से यह स्‍पष्‍ट हो जाता हैं कि अभिकल्‍प के द्वारा एक साथ कम से कम दो स्‍वतन्‍त्र चरों के प्रभावों के अतिरिक्‍त साथ ही साथ, उनके अन्‍तराक्रियात्‍मक(interactive) प्रभाव का भी अध्‍ययन सम्मिलित रहता हैं। इसी प्रकार, क्रमगुणित अभिकल्‍प के कुछ अन्‍य गुण-दोष अग्रलिखित हैं। 

क्रमगुणित अभिकल्‍प के गुण(Merits)

(i) इसके अन्‍तर्गत समस्‍त प्रयोज्‍यों को दो या दो से अधिक स्‍वतन्‍त्र चरों की अभिक्रियायें(treatments) समान रूप से अनुप्रयुक्‍त की जाती हैं।

(ii)  इसके द्वारा प्रत्‍येक स्‍वतन्‍त्र चर की अभिक्र‍िया का मान मापन ऐसे यथार्थ व कठोर आधार पर सम्‍पन्‍न किया जाता हैं, जैसे कि इसके अन्‍तर्गत केवल एक ही स्‍वतन्‍त्र चर का अध्‍ययन किया जा रहा हो, जबकि इसके द्वारा, वास्‍तव में, दो या दो से अधिक स्‍वतन्‍त्र चरों का एक साथ ही अध्‍ययन किया जाता हैं। 

(iii) इस अभिकल्‍प के माध्‍यम से विभिन्‍न प्रायोगित स्थितियों(experimental conditions) का एक साथ अत्‍याधिक कुशल व परिशुद्ध अध्‍ययन सफलतापूर्वक सम्‍पन्‍न किया जा सकता हैं, क्‍योकिं ऐसे अध्‍ययन में एक स्‍वतन्‍त्र चर की भी विभ‍िन्‍न मात्राओं के अलग-अलग प्रभावों का एक साथ ही सरलतापूर्वक आंकन किया जा सकता हैं।

(iv) यह अभिकल्‍प विभ‍िन्‍न चरों व उनकी विभिन्‍न मात्राओं के एक साथ अध्‍ययन की भी सुविधा प्रदान करता हैं, तथा साथ ही साथ, ऐसे विभिन्‍न चरों को पारस्‍परिक अन्‍तराक्रियाओं(interactions) के प्रभावों का भी सफल आंकन प्रस्‍तुत करता हैं।

(v) क्रमगुणित अभिकल्‍प एक अति संवेदनशील अभिकल्‍प होता हैं, क्‍योंकि यह विभिन्‍न प्रायोगिक अभिक्रियाओं के प्रभावों का यथार्थ व परिशुद्ध मापन एक साथ सम्‍पन्‍न करता हैं।

(vi) क्रमगुणित अभिकल्‍प के द्वारा प्राप्‍त आँँकडों के विश्‍लेषण में उच्‍च स्‍तर की सांख्यिकीय प्रविधियों को अनुप्रयुक्‍त किया  जाता हैं, जिससे इस विधि द्वारा संवेदनशील, सूक्ष्‍म व उच्‍च वैज्ञानिक स्‍तर के निष्‍कर्ष उपलब्‍ध होते हैं।

(vii) उपलब्‍ध साधनों के दृष्टिकोण से भी यह अभिकल्‍प अमितव्‍ययी रहती हैं।

क्रमगुणित अभिकल्‍प के दोष(Demerits)

(i) यदि ऐसे अभिकल्‍प में तीन या चार से अधिक स्‍वतन्‍त्र चरों व स्‍तरों(levels) को एक-साथ अनुप्रयुक्‍त किया जाता हैं, तब इससे प्रयोज्‍यों की अत्‍यधिक संख्‍या में आवश्‍यकता पडती हैं जो एक विशेष व्‍यावहारिक कठिनाई होती हैं।

(ii) इसके द्वारा प्राप्‍त निष्‍कषों का स्‍वरूप सम्‍बन्धि‍त चरों के पारस्परिक अन्‍तराक्रियाओं के अर्न्‍तसंबंधों के कारण प्राय: सरल न रहकर विषम ही रहता हैं। वास्‍तव में निष्‍कर्षों की ऐसी विषमता क्रमगुणित अभिकल्‍प की विशेषता होती हैं, इसके आलोचना नहीं: 

(iii) यह एक अपेक्षाकृत दीर्घ व्‍यापक व संवेदनशील अध्‍ययन होता है अत: इसके अन्‍तर्गत प्रयोज्‍यों के वितरण सम्‍बन्‍धी प्रायोगिक अभिक्रियाओं की अनुप्रयुक्ति संबंधी व प्रायोगिक प्रक्रिया की अन्‍य संचालन सम्‍बन्‍धी थोडी-सी भी असावधानी से प्राप्‍त निष्‍कर्षों पर गम्‍भीर व दूषित प्रभाव पड सकते हैं।

(iv) क्रमगुणित अभिकल्‍प की अपेक्षा एक स्‍वतन्‍त्र चर की इष्‍टतम(optimal) मात्राओं के अध्‍ययन के लिये प्राय: एक साधारण प्रयोगशाला प्रयोग ही अधिक कुशल रहता हैं।

(v) क्रमगुणित अभिकल्‍प की रचना तथा इसका संचालन व इसके द्वारा प्राप्‍त ऑंकडों का विश्‍लेषण भी एक अति विषम प्रक्रम होता हैं।

(vi) इस अभिकल्‍प के माध्‍यम से जब तीन अथवा चार से अधिक स्‍वतन्‍त्र चरों के प्रभावों का एक साथ अध्‍ययन किया जाता हैं, तब इससे उनके सांपेक्षिक प्रभावों का आंकन सबल न रहकर प्राय: निर्बल(weak) ही रहता हैं।





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